🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 294

The Book of Ayodhyā · Entry 294 of 664 · type: चौपाई

गुह सारथिहि फिरेउ पहुँचाई। बिरहु बिषादु बरनि नहिं जाई।। चले अवध लेइ रथहि निषादा। होहि छनहिं छन मगन बिषादा।। सोच सुमंत्र बिकल दुख दीना। धिग जीवन रघुबीर बिहीना।। रहिहि न अंतहुँ अधम सरीरू। जसु न लहेउ बिछुरत रघुबीरू।। भए अजस अघ भाजन प्राना। कवन हेतु नहिं करत पयाना।। अहह मंद मनु अवसर चूका। अजहुँ न हृदय होत दुइ टूका।। मीजि हाथ सिरु धुनि पछिताई। मनहँ कृपन धन रासि गवाँई।। बिरिद बाँधि बर बीरु कहाई। चलेउ समर जनु सुभट पराई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 294 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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