🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 290

The Book of Ayodhyā · Entry 290 of 664 · type: चौपाई

जोगवहिं प्रभु सिय लखनहिं कैसें। पलक बिलोचन गोलक जैसें।। सेवहिं लखनु सीय रघुबीरहि। जिमि अबिबेकी पुरुष सरीरहि।। एहि बिधि प्रभु बन बसहिं सुखारी। खग मृग सुर तापस हितकारी।। कहेउँ राम बन गवनु सुहावा। सुनहु सुमंत्र अवध जिमि आवा।। फिरेउ निषादु प्रभुहि पहुँचाई। सचिव सहित रथ देखेसि आई।। मंत्री बिकल बिलोकि निषादू। कहि न जाइ जस भयउ बिषादू।। राम राम सिय लखन पुकारी। परेउ धरनितल ब्याकुल भारी।। देखि दखिन दिसि हय हिहिनाहीं। जनु बिनु पंख बिहग अकुलाहीं।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 290 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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