🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 284

The Book of Ayodhyā · Entry 284 of 664 · type: चौपाई

नयनवंत रघुबरहि बिलोकी। पाइ जनम फल होहिं बिसोकी।। परसि चरन रज अचर सुखारी। भए परम पद के अधिकारी।। सो बनु सैलु सुभायँ सुहावन। मंगलमय अति पावन पावन।। महिमा कहिअ कवनि बिधि तासू। सुखसागर जहँ कीन्ह निवासू।। पय पयोधि तजि अवध बिहाई। जहँ सिय लखनु रामु रहे आई।। कहि न सकहिं सुषमा जसि कानन। जौं सत सहस होंहिं सहसानन।। सो मैं बरनि कहौं बिधि केहीं। डाबर कमठ कि मंदर लेहीं।। सेवहिं लखनु करम मन बानी। जाइ न सीलु सनेहु बखानी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 284 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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