🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 282

The Book of Ayodhyā · Entry 282 of 664 · type: चौपाई

केरि केहरि कपि कोल कुरंगा। बिगतबैर बिचरहिं सब संगा।। फिरत अहेर राम छबि देखी। होहिं मुदित मृगबंद बिसेषी।। बिबुध बिपिन जहँ लगि जग माहीं। देखि राम बनु सकल सिहाहीं।। सुरसरि सरसइ दिनकर कन्या। मेकलसुता गोदावरि धन्या।। सब सर सिंधु नदी नद नाना। मंदाकिनि कर करहिं बखाना।। उदय अस्त गिरि अरु कैलासू। मंदर मेरु सकल सुरबासू।। सैल हिमाचल आदिक जेते। चित्रकूट जसु गावहिं तेते।। बिंधि मुदित मन सुखु न समाई। श्रम बिनु बिपुल बड़ाई पाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 282 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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