🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 276

The Book of Ayodhyā · Entry 276 of 664 · type: चौपाई

यह सुधि कोल किरातन्ह पाई। हरषे जनु नव निधि घर आई।। कंद मूल फल भरि भरि दोना। चले रंक जनु लूटन सोना।। तिन्ह महँ जिन्ह देखे दोउ भ्राता। अपर तिन्हहि पूँछहि मगु जाता।। कहत सुनत रघुबीर निकाई। आइ सबन्हि देखे रघुराई।। करहिं जोहारु भेंट धरि आगे। प्रभुहि बिलोकहिं अति अनुरागे।। चित्र लिखे जनु जहँ तहँ ठाढ़े। पुलक सरीर नयन जल बाढ़े।। राम सनेह मगन सब जाने। कहि प्रिय बचन सकल सनमाने।। प्रभुहि जोहारि बहोरि बहोरी। बचन बिनीत कहहिं कर जोरी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 276 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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