🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 272

The Book of Ayodhyā · Entry 272 of 664 · type: चौपाई

रघुबर कहेउ लखन भल घाटू। करहु कतहुँ अब ठाहर ठाटू।। लखन दीख पय उतर करारा। चहुँ दिसि फिरेउ धनुष जिमि नारा।। नदी पनच सर सम दम दाना। सकल कलुष कलि साउज नाना।। चित्रकूट जनु अचल अहेरी। चुकइ न घात मार मुठभेरी।। अस कहि लखन ठाउँ देखरावा। थलु बिलोकि रघुबर सुखु पावा।। रमेउ राम मनु देवन्ह जाना। चले सहित सुर थपति प्रधाना।। कोल किरात बेष सब आए। रचे परन तृन सदन सुहाए।। बरनि न जाहि मंजु दुइ साला। एक ललित लघु एक बिसाला।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 272 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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