🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 270

The Book of Ayodhyā · Entry 270 of 664 · type: चौपाई

एहि बिधि मुनिबर भवन देखाए। बचन सप्रेम राम मन भाए।। कह मुनि सुनहु भानुकुलनायक। आश्रम कहउँ समय सुखदायक।। चित्रकूट गिरि करहु निवासू। तहँ तुम्हार सब भाँति सुपासू।। सैलु सुहावन कानन चारू। करि केहरि मृग बिहग बिहारू।। नदी पुनीत पुरान बखानी। अत्रिप्रिया निज तपबल आनी।। सुरसरि धार नाउँ मंदाकिनि। जो सब पातक पोतक डाकिनि।। अत्रि आदि मुनिबर बहु बसहीं। करहिं जोग जप तप तन कसहीं।। चलहु सफल श्रम सब कर करहू। राम देहु गौरव गिरिबरहू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 270 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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