🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 268

The Book of Ayodhyā · Entry 268 of 664 · type: चौपाई

अवगुन तजि सब के गुन गहहीं। बिप्र धेनु हित संकट सहहीं।। नीति निपुन जिन्ह कइ जग लीका। घर तुम्हार तिन्ह कर मनु नीका।। गुन तुम्हार समुझइ निज दोसा। जेहि सब भाँति तुम्हार भरोसा।। राम भगत प्रिय लागहिं जेही। तेहि उर बसहु सहित बैदेही।। जाति पाँति धनु धरम बड़ाई। प्रिय परिवार सदन सुखदाई।। सब तजि तुम्हहि रहइ उर लाई। तेहि के हृदयँ रहहु रघुराई।। सरगु नरकु अपबरगु समाना। जहँ तहँ देख धरें धनु बाना।। करम बचन मन राउर चेरा। राम करहु तेहि कें उर डेरा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 268 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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