🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 257

The Book of Ayodhyā · Entry 257 of 664 · type: चौपाई

देखि पाय मुनिराय तुम्हारे। भए सुकृत सब सुफल हमारे।। अब जहँ राउर आयसु होई। मुनि उदबेगु न पावै कोई।। मुनि तापस जिन्ह तें दुखु लहहीं। ते नरेस बिनु पावक दहहीं।। मंगल मूल बिप्र परितोषू। दहइ कोटि कुल भूसुर रोषू।। अस जियँ जानि कहिअ सोइ ठाऊँ। सिय सौमित्रि सहित जहँ जाऊँ।। तहँ रचि रुचिर परन तृन साला। बासु करौ कछु काल कृपाला।। सहज सरल सुनि रघुबर बानी। साधु साधु बोले मुनि ग्यानी।। कस न कहहु अस रघुकुलकेतू। तुम्ह पालक संतत श्रुति सेतू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 257 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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