🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 253

The Book of Ayodhyā · Entry 253 of 664 · type: चौपाई

अजहुँ जासु उर सपनेहुँ काऊ। बसहुँ लखनु सिय रामु बटाऊ।। राम धाम पथ पाइहि सोई। जो पथ पाव कबहुँ मुनि कोई।। तब रघुबीर श्रमित सिय जानी। देखि निकट बटु सीतल पानी।। तहँ बसि कंद मूल फल खाई। प्रात नहाइ चले रघुराई।। देखत बन सर सैल सुहाए। बालमीकि आश्रम प्रभु आए।। राम दीख मुनि बासु सुहावन। सुंदर गिरि काननु जलु पावन।। सरनि सरोज बिटप बन फूले। गुंजत मंजु मधुप रस भूले।। खग मृग बिपुल कोलाहल करहीं। बिरहित बैर मुदित मन चरहीं।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 253 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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