🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 237

The Book of Ayodhyā · Entry 237 of 664 · type: चौपाई

बरनि न जाइ मनोहर जोरी। सोभा बहुत थोरि मति मोरी।। राम लखन सिय सुंदरताई। सब चितवहिं चित मन मति लाई।। थके नारि नर प्रेम पिआसे। मनहुँ मृगी मृग देखि दिआ से।। सीय समीप ग्रामतिय जाहीं। पूँछत अति सनेहँ सकुचाहीं।। बार बार सब लागहिं पाएँ। कहहिं बचन मृदु सरल सुभाएँ।। राजकुमारि बिनय हम करहीं। तिय सुभायँ कछु पूँछत डरहीं। स्वामिनि अबिनय छमबि हमारी। बिलगु न मानब जानि गवाँरी।। राजकुअँर दोउ सहज सलोने। इन्ह तें लही दुति मरकत सोने।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 237 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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