🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 235

The Book of Ayodhyā · Entry 235 of 664 · type: चौपाई

एक कलस भरि आनहिं पानी। अँचइअ नाथ कहहिं मृदु बानी।। सुनि प्रिय बचन प्रीति अति देखी। राम कृपाल सुसील बिसेषी।। जानी श्रमित सीय मन माहीं। घरिक बिलंबु कीन्ह बट छाहीं।। मुदित नारि नर देखहिं सोभा। रूप अनूप नयन मनु लोभा।। एकटक सब सोहहिं चहुँ ओरा। रामचंद्र मुख चंद चकोरा।। तरुन तमाल बरन तनु सोहा। देखत कोटि मदन मनु मोहा।। दामिनि बरन लखन सुठि नीके। नख सिख सुभग भावते जी के।। मुनिपट कटिन्ह कसें तूनीरा। सोहहिं कर कमलिनि धनु तीरा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 235 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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