🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 233

The Book of Ayodhyā · Entry 233 of 664 · type: चौपाई

सीता लखन सहित रघुराई। गाँव निकट जब निकसहिं जाई।। सुनि सब बाल बृद्ध नर नारी। चलहिं तुरत गृहकाजु बिसारी।। राम लखन सिय रूप निहारी। पाइ नयनफलु होहिं सुखारी।। सजल बिलोचन पुलक सरीरा। सब भए मगन देखि दोउ बीरा।। बरनि न जाइ दसा तिन्ह केरी। लहि जनु रंकन्ह सुरमनि ढेरी।। एकन्ह एक बोलि सिख देहीं। लोचन लाहु लेहु छन एहीं।। रामहि देखि एक अनुरागे। चितवत चले जाहिं सँग लागे।। एक नयन मग छबि उर आनी। होहिं सिथिल तन मन बर बानी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 233 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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