🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 225

The Book of Ayodhyā · Entry 225 of 664 · type: चौपाई

सुनत तीरवासी नर नारी। धाए निज निज काज बिसारी।। लखन राम सिय सुन्दरताई। देखि करहिं निज भाग्य बड़ाई।। अति लालसा बसहिं मन माहीं। नाउँ गाउँ बूझत सकुचाहीं।। जे तिन्ह महुँ बयबिरिध सयाने। तिन्ह करि जुगुति रामु पहिचाने।। सकल कथा तिन्ह सबहि सुनाई। बनहि चले पितु आयसु पाई।। सुनि सबिषाद सकल पछिताहीं। रानी रायँ कीन्ह भल नाहीं।। तेहि अवसर एक तापसु आवा। तेजपुंज लघुबयस सुहावा।। कवि अलखित गति बेषु बिरागी। मन क्रम बचन राम अनुरागी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 225 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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