🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 223

The Book of Ayodhyā · Entry 223 of 664 · type: चौपाई

राम सप्रेम कहेउ मुनि पाहीं। नाथ कहिअ हम केहि मग जाहीं।। मुनि मन बिहसि राम सन कहहीं। सुगम सकल मग तुम्ह कहुँ अहहीं।। साथ लागि मुनि सिष्य बोलाए। सुनि मन मुदित पचासक आए।। सबन्हि राम पर प्रेम अपारा। सकल कहहि मगु दीख हमारा।। मुनि बटु चारि संग तब दीन्हे। जिन्ह बहु जनम सुकृत सब कीन्हे।। करि प्रनामु रिषि आयसु पाई। प्रमुदित हृदयँ चले रघुराई।। ग्राम निकट जब निकसहि जाई। देखहि दरसु नारि नर धाई।। होहि सनाथ जनम फलु पाई। फिरहि दुखित मनु संग पठाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 223 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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