🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 221

The Book of Ayodhyā · Entry 221 of 664 · type: चौपाई

सुनि मुनि बचन रामु सकुचाने। भाव भगति आनंद अघाने।। तब रघुबर मुनि सुजसु सुहावा। कोटि भाँति कहि सबहि सुनावा।। सो बड सो सब गुन गन गेहू। जेहि मुनीस तुम्ह आदर देहू।। मुनि रघुबीर परसपर नवहीं। बचन अगोचर सुखु अनुभवहीं।। यह सुधि पाइ प्रयाग निवासी। बटु तापस मुनि सिद्ध उदासी।। भरद्वाज आश्रम सब आए। देखन दसरथ सुअन सुहाए।। राम प्रनाम कीन्ह सब काहू। मुदित भए लहि लोयन लाहू।। देहिं असीस परम सुखु पाई। फिरे सराहत सुंदरताई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 221 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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