🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 217

The Book of Ayodhyā · Entry 217 of 664 · type: चौपाई

को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ। कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ।। अस तीरथपति देखि सुहावा। सुख सागर रघुबर सुखु पावा।। कहि सिय लखनहि सखहि सुनाई। श्रीमुख तीरथराज बड़ाई।। करि प्रनामु देखत बन बागा। कहत महातम अति अनुरागा।। एहि बिधि आइ बिलोकी बेनी। सुमिरत सकल सुमंगल देनी।। मुदित नहाइ कीन्हि सिव सेवा। पुजि जथाबिधि तीरथ देवा।। तब प्रभु भरद्वाज पहिं आए। करत दंडवत मुनि उर लाए।। मुनि मन मोद न कछु कहि जाइ। ब्रह्मानंद रासि जनु पाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 217 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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