🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 213

The Book of Ayodhyā · Entry 213 of 664 · type: चौपाई

गंग बचन सुनि मंगल मूला। मुदित सीय सुरसरि अनुकुला।। तब प्रभु गुहहि कहेउ घर जाहू। सुनत सूख मुखु भा उर दाहू।। दीन बचन गुह कह कर जोरी। बिनय सुनहु रघुकुलमनि मोरी।। नाथ साथ रहि पंथु देखाई। करि दिन चारि चरन सेवकाई।। जेहिं बन जाइ रहब रघुराई। परनकुटी मैं करबि सुहाई।। तब मोहि कहँ जसि देब रजाई। सोइ करिहउँ रघुबीर दोहाई।। सहज सनेह राम लखि तासु। संग लीन्ह गुह हृदय हुलासू।। पुनि गुहँ ग्याति बोलि सब लीन्हे। करि परितोषु बिदा तब कीन्हे।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 213 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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