🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 211

The Book of Ayodhyā · Entry 211 of 664 · type: चौपाई

तब मज्जनु करि रघुकुलनाथा। पूजि पारथिव नायउ माथा।। सियँ सुरसरिहि कहेउ कर जोरी। मातु मनोरथ पुरउबि मोरी।। पति देवर संग कुसल बहोरी। आइ करौं जेहिं पूजा तोरी।। सुनि सिय बिनय प्रेम रस सानी। भइ तब बिमल बारि बर बानी।। सुनु रघुबीर प्रिया बैदेही। तव प्रभाउ जग बिदित न केही।। लोकप होहिं बिलोकत तोरें। तोहि सेवहिं सब सिधि कर जोरें।। तुम्ह जो हमहि बड़ि बिनय सुनाई। कृपा कीन्हि मोहि दीन्हि बड़ाई।। तदपि देबि मैं देबि असीसा। सफल होपन हित निज बागीसा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 211 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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