🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 21

The Book of Ayodhyā · Entry 21 of 664 · type: चौपाई

बरनि राम गुन सीलु सुभाऊ। बोले प्रेम पुलकि मुनिराऊ।। भूप सजेउ अभिषेक समाजू। चाहत देन तुम्हहि जुबराजू।। राम करहु सब संजम आजू। जौं बिधि कुसल निबाहै काजू।। गुरु सिख देइ राय पहिं गयउ। राम हृदयँ अस बिसमउ भयऊ।। जनमे एक संग सब भाई। भोजन सयन केलि लरिकाई।। करनबेध उपबीत बिआहा। संग संग सब भए उछाहा।। बिमल बंस यहु अनुचित एकू। बंधु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू।। प्रभु सप्रेम पछितानि सुहाई। हरउ भगत मन कै कुटिलाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 21 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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