🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 209

The Book of Ayodhyā · Entry 209 of 664 · type: चौपाई

उतरि ठाड़ भए सुरसरि रेता। सीयराम गुह लखन समेता।। केवट उतरि दंडवत कीन्हा। प्रभुहि सकुच एहि नहिं कछु दीन्हा।। पिय हिय की सिय जाननिहारी। मनि मुदरी मन मुदित उतारी।। कहेउ कृपाल लेहि उतराई। केवट चरन गहे अकुलाई।। नाथ आजु मैं काह न पावा। मिटे दोष दुख दारिद दावा।। बहुत काल मैं कीन्हि मजूरी। आजु दीन्ह बिधि बनि भलि भूरी।। अब कछु नाथ न चाहिअ मोरें। दीनदयाल अनुग्रह तोरें।। फिरती बार मोहि जे देबा। सो प्रसादु मैं सिर धरि लेबा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 209 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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