🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 207

The Book of Ayodhyā · Entry 207 of 664 · type: चौपाई

कृपासिंधु बोले मुसुकाई। सोइ करु जेंहि तव नाव न जाई।। वेगि आनु जल पाय पखारू। होत बिलंबु उतारहि पारू।। जासु नाम सुमरत एक बारा। उतरहिं नर भवसिंधु अपारा।। सोइ कृपालु केवटहि निहोरा। जेहिं जगु किय तिहु पगहु ते थोरा।। पद नख निरखि देवसरि हरषी। सुनि प्रभु बचन मोहँ मति करषी।। केवट राम रजायसु पावा। पानि कठवता भरि लेइ आवा।। अति आनंद उमगि अनुरागा। चरन सरोज पखारन लागा।। बरषि सुमन सुर सकल सिहाहीं। एहि सम पुन्यपुंज कोउ नाहीं।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 207 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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