🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 204

The Book of Ayodhyā · Entry 204 of 664 · type: चौपाई

जासु बियोग बिकल पसु ऐसे। प्रजा मातु पितु जिइहहिं कैसें।। बरबस राम सुमंत्रु पठाए। सुरसरि तीर आपु तब आए।। मागी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना।। चरन कमल रज कहुँ सबु कहई। मानुष करनि मूरि कछु अहई।। छुअत सिला भइ नारि सुहाई। पाहन तें न काठ कठिनाई।। तरनिउ मुनि घरिनि होइ जाई। बाट परइ मोरि नाव उड़ाई।। एहिं प्रतिपालउँ सबु परिवारू। नहिं जानउँ कछु अउर कबारू।। जौ प्रभु पार अवसि गा चहहू। मोहि पद पदुम पखारन कहहू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 204 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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