🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 200

The Book of Ayodhyā · Entry 200 of 664 · type: चौपाई

पितु बैभव बिलास मैं डीठा। नृप मनि मुकुट मिलित पद पीठा।। सुखनिधान अस पितु गृह मोरें। पिय बिहीन मन भाव न भोरें।। ससुर चक्कवइ कोसलराऊ। भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ।। आगें होइ जेहि सुरपति लेई। अरध सिंघासन आसनु देई।। ससुरु एतादृस अवध निवासू। प्रिय परिवारु मातु सम सासू।। बिनु रघुपति पद पदुम परागा। मोहि केउ सपनेहुँ सुखद न लागा।। अगम पंथ बनभूमि पहारा। करि केहरि सर सरित अपारा।। कोल किरात कुरंग बिहंगा। मोहि सब सुखद प्रानपति संगा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 200 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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