🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 184

The Book of Ayodhyā · Entry 184 of 664 · type: चौपाई

उठे लखनु प्रभु सोवत जानी। कहि सचिवहि सोवन मृदु बानी।। कछुक दूर सजि बान सरासन। जागन लगे बैठि बीरासन।। गुँह बोलाइ पाहरू प्रतीती। ठावँ ठाँव राखे अति प्रीती।। आपु लखन पहिं बैठेउ जाई। कटि भाथी सर चाप चढ़ाई।। सोवत प्रभुहि निहारि निषादू। भयउ प्रेम बस ह्दयँ बिषादू।। तनु पुलकित जलु लोचन बहई। बचन सप्रेम लखन सन कहई।। भूपति भवन सुभायँ सुहावा। सुरपति सदनु न पटतर पावा।। मनिमय रचित चारु चौबारे। जनु रतिपति निज हाथ सँवारे।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 184 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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