🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 182

The Book of Ayodhyā · Entry 182 of 664 · type: चौपाई

राम लखन सिय रूप निहारी। कहहिं सप्रेम ग्राम नर नारी।। ते पितु मातु कहहु सखि कैसे। जिन्ह पठए बन बालक ऐसे।। एक कहहिं भल भूपति कीन्हा। लोयन लाहु हमहि बिधि दीन्हा।। तब निषादपति उर अनुमाना। तरु सिंसुपा मनोहर जाना।। लै रघुनाथहि ठाउँ देखावा। कहेउ राम सब भाँति सुहावा।। पुरजन करि जोहारु घर आए। रघुबर संध्या करन सिधाए।। गुहँ सँवारि साँथरी डसाई। कुस किसलयमय मृदुल सुहाई।। सुचि फल मूल मधुर मृदु जानी। दोना भरि भरि राखेसि पानी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 182 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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