🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 180

The Book of Ayodhyā · Entry 180 of 664 · type: चौपाई

यह सुधि गुहँ निषाद जब पाई। मुदित लिए प्रिय बंधु बोलाई।। लिए फल मूल भेंट भरि भारा। मिलन चलेउ हिंयँ हरषु अपारा।। करि दंडवत भेंट धरि आगें। प्रभुहि बिलोकत अति अनुरागें।। सहज सनेह बिबस रघुराई। पूँछी कुसल निकट बैठाई।। नाथ कुसल पद पंकज देखें। भयउँ भागभाजन जन लेखें।। देव धरनि धनु धामु तुम्हारा। मैं जनु नीचु सहित परिवारा।। कृपा करिअ पुर धारिअ पाऊ। थापिय जनु सबु लोगु सिहाऊ।। कहेहु सत्य सबु सखा सुजाना। मोहि दीन्ह पितु आयसु आना।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 180 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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