🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 170

The Book of Ayodhyā · Entry 170 of 664 · type: चौपाई

तब सुमंत्र नृप बचन सुनाए। करि बिनती रथ रामु चढ़ाए।। चढ़ि रथ सीय सहित दोउ भाई। चले हृदयँ अवधहि सिरु नाई।। चलत रामु लखि अवध अनाथा। बिकल लोग सब लागे साथा।। कृपासिंधु बहुबिधि समुझावहिं। फिरहिं प्रेम बस पुनि फिरि आवहिं।। लागति अवध भयावनि भारी। मानहुँ कालराति अँधिआरी।। घोर जंतु सम पुर नर नारी। डरपहिं एकहि एक निहारी।। घर मसान परिजन जनु भूता। सुत हित मीत मनहुँ जमदूता।। बागन्ह बिटप बेलि कुम्हिलाहीं। सरित सरोवर देखि न जाहीं।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 170 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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