🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 17

The Book of Ayodhyā · Entry 17 of 664 · type: चौपाई

प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाए। भूषन बसन भूरि तिन्ह पाए।। प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं।। चौकें चारु सुमित्राँ पुरी। मनिमय बिबिध भाँति अति रुरी।। आनँद मगन राम महतारी। दिए दान बहु बिप्र हँकारी।। पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा। कहेउ बहोरि देन बलिभागा।। जेहि बिधि होइ राम कल्यानू। देहु दया करि सो बरदानू।। गावहिं मंगल कोकिलबयनीं। बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 17 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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