🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 166

The Book of Ayodhyā · Entry 166 of 664 · type: चौपाई

एहि बिधि राम सबहि समुझावा। गुर पद पदुम हरषि सिरु नावा। गनपती गौरि गिरीसु मनाई। चले असीस पाइ रघुराई।। राम चलत अति भयउ बिषादू। सुनि न जाइ पुर आरत नादू।। कुसगुन लंक अवध अति सोकू। हहरष बिषाद बिबस सुरलोकू।। गइ मुरुछा तब भूपति जागे। बोलि सुमंत्रु कहन अस लागे।। रामु चले बन प्रान न जाहीं। केहि सुख लागि रहत तन माहीं। एहि तें कवन ब्यथा बलवाना। जो दुखु पाइ तजहिं तनु प्राना।। पुनि धरि धीर कहइ नरनाहू। लै रथु संग सखा तुम्ह जाहू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 166 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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