🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 164

The Book of Ayodhyā · Entry 164 of 664 · type: चौपाई

निकसि बसिष्ठ द्वार भए ठाढ़े। देखे लोग बिरह दव दाढ़े।। कहि प्रिय बचन सकल समुझाए। बिप्र बृंद रघुबीर बोलाए।। गुर सन कहि बरषासन दीन्हे। आदर दान बिनय बस कीन्हे।। जाचक दान मान संतोषे। मीत पुनीत प्रेम परितोषे।। दासीं दास बोलाइ बहोरी। गुरहि सौंपि बोले कर जोरी।। सब कै सार सँभार गोसाईं। करबि जनक जननी की नाई।। बारहिं बार जोरि जुग पानी। कहत रामु सब सन मृदु बानी।। सोइ सब भाँति मोर हितकारी। जेहि तें रहै भुआल सुखारी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 164 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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