🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 162

The Book of Ayodhyā · Entry 162 of 664 · type: चौपाई

सीय सकुच बस उतरु न देई। सो सुनि तमकि उठी कैकेई।। मुनि पट भूषन भाजन आनी। आगें धरि बोली मृदु बानी।। नृपहि प्रान प्रिय तुम्ह रघुबीरा। सील सनेह न छाड़िहि भीरा।। सुकृत सुजसु परलोकु नसाऊ। तुम्हहि जान बन कहिहि न काऊ।। अस बिचारि सोइ करहु जो भावा। राम जननि सिख सुनि सुखु पावा।। भूपहि बचन बानसम लागे। करहिं न प्रान पयान अभागे।। लोग बिकल मुरुछित नरनाहू। काह करिअ कछु सूझ न काहू।। रामु तुरत मुनि बेषु बनाई। चले जनक जननिहि सिरु नाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 162 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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