🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 160

The Book of Ayodhyā · Entry 160 of 664 · type: चौपाई

रायँ राम राखन हित लागी। बहुत उपाय किए छलु त्यागी।। लखी राम रुख रहत न जाने। धरम धुरंधर धीर सयाने।। तब नृप सीय लाइ उर लीन्ही। अति हित बहुत भाँति सिख दीन्ही।। कहि बन के दुख दुसह सुनाए। सासु ससुर पितु सुख समुझाए।। सिय मनु राम चरन अनुरागा। घरु न सुगमु बनु बिषमु न लागा।। औरउ सबहिं सीय समुझाई। कहि कहि बिपिन बिपति अधिकाई।। सचिव नारि गुर नारि सयानी। सहित सनेह कहहिं मृदु बानी।। तुम्ह कहुँ तौ न दीन्ह बनबासू। करहु जो कहहिं ससुर गुर सासू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 160 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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