🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 158

The Book of Ayodhyā · Entry 158 of 664 · type: चौपाई

सकइ न बोलि बिकल नरनाहू। सोक जनित उर दारुन दाहू।। नाइ सीसु पद अति अनुरागा। उठि रघुबीर बिदा तब मागा।। पितु असीस आयसु मोहि दीजै। हरष समय बिसमउ कत कीजै।। तात किएँ प्रिय प्रेम प्रमादू। जसु जग जाइ होइ अपबादू।। सुनि सनेह बस उठि नरनाहाँ। बैठारे रघुपति गहि बाहाँ।। सुनहु तात तुम्ह कहुँ मुनि कहहीं। रामु चराचर नायक अहहीं।। सुभ अरु असुभ करम अनुहारी। ईस देइ फलु ह्दयँ बिचारी।। करइ जो करम पाव फल सोई। निगम नीति असि कह सबु कोई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 158 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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