🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 151

The Book of Ayodhyā · Entry 151 of 664 · type: चौपाई

धीरजु धरेउ कुअवसर जानी। सहज सुह्द बोली मृदु बानी।। तात तुम्हारि मातु बैदेही। पिता रामु सब भाँति सनेही।। अवध तहाँ जहँ राम निवासू। तहँइँ दिवसु जहँ भानु प्रकासू।। जौ पै सीय रामु बन जाहीं। अवध तुम्हार काजु कछु नाहिं।। गुर पितु मातु बंधु सुर साई। सेइअहिं सकल प्रान की नाईं।। रामु प्रानप्रिय जीवन जी के। स्वारथ रहित सखा सबही कै।। पूजनीय प्रिय परम जहाँ तें। सब मानिअहिं राम के नातें।। अस जियँ जानि संग बन जाहू। लेहु तात जग जीवन लाहू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 151 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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