🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 149

The Book of Ayodhyā · Entry 149 of 664 · type: चौपाई

मागहु बिदा मातु सन जाई। आवहु बेगि चलहु बन भाई।। मुदित भए सुनि रघुबर बानी। भयउ लाभ बड़ गइ बड़ि हानी।। हरषित ह्दयँ मातु पहिं आए। मनहुँ अंध फिरि लोचन पाए। जाइ जननि पग नायउ माथा। मनु रघुनंदन जानकि साथा।। पूँछे मातु मलिन मन देखी। लखन कही सब कथा बिसेषी।। गई सहमि सुनि बचन कठोरा। मृगी देखि दव जनु चहु ओरा।। लखन लखेउ भा अनरथ आजू। एहिं सनेह बस करब अकाजू।। मागत बिदा सभय सकुचाहीं। जाइ संग बिधि कहिहि कि नाही।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 149 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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