🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 143

The Book of Ayodhyā · Entry 143 of 664 · type: चौपाई

समाचार जब लछिमन पाए। ब्याकुल बिलख बदन उठि धाए।। कंप पुलक तन नयन सनीरा। गहे चरन अति प्रेम अधीरा।। कहि न सकत कछु चितवत ठाढ़े। मीनु दीन जनु जल तें काढ़े।। सोचु हृदयँ बिधि का होनिहारा। सबु सुखु सुकृत सिरान हमारा।। मो कहुँ काह कहब रघुनाथा। रखिहहिं भवन कि लेहहिं साथा।। राम बिलोकि बंधु कर जोरें। देह गेह सब सन तृनु तोरें।। बोले बचनु राम नय नागर। सील सनेह सरल सुख सागर।। तात प्रेम बस जनि कदराहू। समुझि हृदयँ परिनाम उछाहू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 143 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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