🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 141

The Book of Ayodhyā · Entry 141 of 664 · type: चौपाई

लखि सनेह कातरि महतारी। बचनु न आव बिकल भइ भारी।। राम प्रबोधु कीन्ह बिधि नाना। समउ सनेहु न जाइ बखाना।। तब जानकी सासु पग लागी। सुनिअ माय मैं परम अभागी।। सेवा समय दैअँ बनु दीन्हा। मोर मनोरथु सफल न कीन्हा।। तजब छोभु जनि छाड़िअ छोहू। करमु कठिन कछु दोसु न मोहू।। सुनि सिय बचन सासु अकुलानी। दसा कवनि बिधि कहौं बखानी।। बारहि बार लाइ उर लीन्ही। धरि धीरजु सिख आसिष दीन्ही।। अचल होउ अहिवातु तुम्हारा। जब लगि गंग जमुन जल धारा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 141 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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