🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 139

The Book of Ayodhyā · Entry 139 of 664 · type: चौपाई

अस कहि सीय बिकल भइ भारी। बचन बियोगु न सकी सँभारी।। देखि दसा रघुपति जियँ जाना। हठि राखें नहिं राखिहि प्राना।। कहेउ कृपाल भानुकुलनाथा। परिहरि सोचु चलहु बन साथा।। नहिं बिषाद कर अवसरु आजू। बेगि करहु बन गवन समाजू।। कहि प्रिय बचन प्रिया समुझाई। लगे मातु पद आसिष पाई।। बेगि प्रजा दुख मेटब आई। जननी निठुर बिसरि जनि जाई।। फिरहि दसा बिधि बहुरि कि मोरी। देखिहउँ नयन मनोहर जोरी।। सुदिन सुघरी तात कब होइहि। जननी जिअत बदन बिधु जोइहि।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 139 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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