🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 137

The Book of Ayodhyā · Entry 137 of 664 · type: चौपाई

मोहि मग चलत न होइहि हारी। छिनु छिनु चरन सरोज निहारी।। सबहि भाँति पिय सेवा करिहौं। मारग जनित सकल श्रम हरिहौं।। पाय पखारी बैठि तरु छाहीं। करिहउँ बाउ मुदित मन माहीं।। श्रम कन सहित स्याम तनु देखें। कहँ दुख समउ प्रानपति पेखें।। सम महि तृन तरुपल्लव डासी। पाग पलोटिहि सब निसि दासी।। बारबार मृदु मूरति जोही। लागहि तात बयारि न मोही। को प्रभु सँग मोहि चितवनिहारा। सिंघबधुहि जिमि ससक सिआरा।। मैं सुकुमारि नाथ बन जोगू। तुम्हहि उचित तप मो कहुँ भोगू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 137 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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