🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 131

The Book of Ayodhyā · Entry 131 of 664 · type: चौपाई

सुनि मृदु बचन मनोहर पिय के। लोचन ललित भरे जल सिय के।। सीतल सिख दाहक भइ कैंसें। चकइहि सरद चंद निसि जैंसें।। उतरु न आव बिकल बैदेही। तजन चहत सुचि स्वामि सनेही।। बरबस रोकि बिलोचन बारी। धरि धीरजु उर अवनिकुमारी।। लागि सासु पग कह कर जोरी। छमबि देबि बड़ि अबिनय मोरी।। दीन्हि प्रानपति मोहि सिख सोई। जेहि बिधि मोर परम हित होई।। मैं पुनि समुझि दीखि मन माहीं। पिय बियोग सम दुखु जग नाहीं।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 131 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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