🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 129

The Book of Ayodhyā · Entry 129 of 664 · type: चौपाई

नर अहार रजनीचर चरहीं। कपट बेष बिधि कोटिक करहीं।। लागइ अति पहार कर पानी। बिपिन बिपति नहिं जाइ बखानी।। ब्याल कराल बिहग बन घोरा। निसिचर निकर नारि नर चोरा।। डरपहिं धीर गहन सुधि आएँ। मृगलोचनि तुम्ह भीरु सुभाएँ।। हंसगवनि तुम्ह नहिं बन जोगू। सुनि अपजसु मोहि देइहि लोगू।। मानस सलिल सुधाँ प्रतिपाली। जिअइ कि लवन पयोधि मराली।। नव रसाल बन बिहरनसीला। सोह कि कोकिल बिपिन करीला।। रहहु भवन अस हृदयँ बिचारी। चंदबदनि दुखु कानन भारी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 129 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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