🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 123

The Book of Ayodhyā · Entry 123 of 664 · type: चौपाई

बन हित कोल किरात किसोरी। रचीं बिरंचि बिषय सुख भोरी।। पाइन कृमि जिमि कठिन सुभाऊ। तिन्हहि कलेसु न कानन काऊ।। कै तापस तिय कानन जोगू। जिन्ह तप हेतु तजा सब भोगू।। सिय बन बसिहि तात केहि भाँती। चित्रलिखित कपि देखि डेराती।। सुरसर सुभग बनज बन चारी। डाबर जोगु कि हंसकुमारी।। अस बिचारि जस आयसु होई। मैं सिख देउँ जानकिहि सोई।। जौं सिय भवन रहै कह अंबा। मोहि कहँ होइ बहुत अवलंबा।। सुनि रघुबीर मातु प्रिय बानी। सील सनेह सुधाँ जनु सानी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 123 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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