🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 121

The Book of Ayodhyā · Entry 121 of 664 · type: चौपाई

मैं पुनि पुत्रबधू प्रिय पाई। रूप रासि गुन सील सुहाई।। नयन पुतरि करि प्रीति बढ़ाई। राखेउँ प्रान जानिकिहिं लाई।। कलपबेलि जिमि बहुबिधि लाली। सींचि सनेह सलिल प्रतिपाली।। फूलत फलत भयउ बिधि बामा। जानि न जाइ काह परिनामा।। पलँग पीठ तजि गोद हिंड़ोरा। सियँ न दीन्ह पगु अवनि कठोरा।। जिअनमूरि जिमि जोगवत रहऊँ। दीप बाति नहिं टारन कहऊँ।। सोइ सिय चलन चहति बन साथा। आयसु काह होइ रघुनाथा। चंद किरन रस रसिक चकोरी। रबि रुख नयन सकइ किमि जोरी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 121 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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