🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 117

The Book of Ayodhyā · Entry 117 of 664 · type: चौपाई

देव पितर सब तुन्हहि गोसाई। राखहुँ पलक नयन की नाई।। अवधि अंबु प्रिय परिजन मीना। तुम्ह करुनाकर धरम धुरीना।। अस बिचारि सोइ करहु उपाई। सबहि जिअत जेहिं भेंटेहु आई।। जाहु सुखेन बनहि बलि जाऊँ। करि अनाथ जन परिजन गाऊँ।। सब कर आजु सुकृत फल बीता। भयउ कराल कालु बिपरीता।। बहुबिधि बिलपि चरन लपटानी। परम अभागिनि आपुहि जानी।। दारुन दुसह दाहु उर ब्यापा। बरनि न जाहिं बिलाप कलापा।। राम उठाइ मातु उर लाई। कहि मृदु बचन बहुरि समुझाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 117 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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