🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 115

The Book of Ayodhyā · Entry 115 of 664 · type: चौपाई

जौं केवल पितु आयसु ताता। तौ जनि जाहु जानि बड़ि माता।। जौं पितु मातु कहेउ बन जाना। तौं कानन सत अवध समाना।। पितु बनदेव मातु बनदेवी। खग मृग चरन सरोरुह सेवी।। अंतहुँ उचित नृपहि बनबासू। बय बिलोकि हियँ होइ हराँसू।। बड़भागी बनु अवध अभागी। जो रघुबंसतिलक तुम्ह त्यागी।। जौं सुत कहौ संग मोहि लेहू। तुम्हरे हृदयँ होइ संदेहू।। पूत परम प्रिय तुम्ह सबही के। प्रान प्रान के जीवन जी के।। ते तुम्ह कहहु मातु बन जाऊँ। मैं सुनि बचन बैठि पछिताऊँ।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 115 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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