🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 113

The Book of Ayodhyā · Entry 113 of 664 · type: चौपाई

राखि न सकइ न कहि सक जाहू। दुहूँ भाँति उर दारुन दाहू।। लिखत सुधाकर गा लिखि राहू। बिधि गति बाम सदा सब काहू।। धरम सनेह उभयँ मति घेरी। भइ गति साँप छुछुंदरि केरी।। राखउँ सुतहि करउँ अनुरोधू। धरमु जाइ अरु बंधु बिरोधू।। कहउँ जान बन तौ बड़ि हानी। संकट सोच बिबस भइ रानी।। बहुरि समुझि तिय धरमु सयानी। रामु भरतु दोउ सुत सम जानी।। सरल सुभाउ राम महतारी। बोली बचन धीर धरि भारी।। तात जाउँ बलि कीन्हेहु नीका। पितु आयसु सब धरमक टीका।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 113 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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