🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 111

The Book of Ayodhyā · Entry 111 of 664 · type: चौपाई

बचन बिनीत मधुर रघुबर के। सर सम लगे मातु उर करके।। सहमि सूखि सुनि सीतलि बानी। जिमि जवास परें पावस पानी।। कहि न जाइ कछु हृदय बिषादू। मनहुँ मृगी सुनि केहरि नादू।। नयन सजल तन थर थर काँपी। माजहि खाइ मीन जनु मापी।। धरि धीरजु सुत बदनु निहारी। गदगद बचन कहति महतारी।। तात पितहि तुम्ह प्रानपिआरे। देखि मुदित नित चरित तुम्हारे।। राजु देन कहुँ सुभ दिन साधा। कहेउ जान बन केहिं अपराधा।। तात सुनावहु मोहि निदानू। को दिनकर कुल भयउ कृसानू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 111 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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