🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 107

The Book of Ayodhyā · Entry 107 of 664 · type: चौपाई

रघुकुलतिलक जोरि दोउ हाथा। मुदित मातु पद नायउ माथा।। दीन्हि असीस लाइ उर लीन्हे। भूषन बसन निछावरि कीन्हे।। बार बार मुख चुंबति माता। नयन नेह जलु पुलकित गाता।। गोद राखि पुनि हृदयँ लगाए। स्त्रवत प्रेनरस पयद सुहाए।। प्रेमु प्रमोदु न कछु कहि जाई। रंक धनद पदबी जनु पाई।। सादर सुंदर बदनु निहारी। बोली मधुर बचन महतारी।। कहहु तात जननी बलिहारी। कबहिं लगन मुद मंगलकारी।। सुकृत सील सुख सीवँ सुहाई। जनम लाभ कइ अवधि अघाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 107 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷