🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 105

The Book of Ayodhyā · Entry 105 of 664 · type: चौपाई

उतरु न देइ दुसह रिस रूखी। मृगिन्ह चितव जनु बाघिनि भूखी।। ब्याधि असाधि जानि तिन्ह त्यागी। चलीं कहत मतिमंद अभागी।। राजु करत यह दैअँ बिगोई। कीन्हेसि अस जस करइ न कोई।। एहि बिधि बिलपहिं पुर नर नारीं। देहिं कुचालिहि कोटिक गारीं।। जरहिं बिषम जर लेहिं उसासा। कवनि राम बिनु जीवन आसा।। बिपुल बियोग प्रजा अकुलानी। जनु जलचर गन सूखत पानी।। अति बिषाद बस लोग लोगाई। गए मातु पहिं रामु गोसाई।। मुख प्रसन्न चित चौगुन चाऊ। मिटा सोचु जनि राखै राऊ।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 105 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷